प्यार बदला, सबके नजरीया भी बदला, पगदंडीया भी बोल उठी इतरा कर, रिश्तों कि राहे कुछ हमने भी ... प्यार बदला, सबके नजरीया भी बदला, पगदंडीया भी बोल उठी इतरा कर, रिश्तों ...
आओं हम पगडडियां बनाकर आगें बढ़ते जाए आओं हम पगडडियां बनाकर आगें बढ़ते जाए
ये लंगोटधारी ये लंगोटधारी
लूट गया सब कुछ यूं खड़ा खड़ा बूंद बूंद वो गिर पड़ा.. लूट गया सब कुछ यूं खड़ा खड़ा बूंद बूंद वो गिर पड़ा..
गर्मी की तपन न ठंड की कंपन, मन प्रफुल्लित जो करे बाग देख हरी-भरे गर्मी की तपन न ठंड की कंपन, मन प्रफुल्लित जो करे बाग देख हरी-भरे
ये पत्ते, हरे पत्ते देखते हैं जमीं पर गिरे पीले पत्ते ये पत्ते, हरे पत्ते देखते हैं जमीं पर गिरे पीले पत्ते